कबूतर के बच्चे

  

أَعـوذُ بِاللهِ مِنَ الشَّيْـطانِ الرَّجيـم

           
   بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِيْمِ  

दूसरा बाब


हिक़ायत 27

कबूतर के बच्चे

एक आराबी अपनी आस्तीन में  छुपाये हुए हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अकुछलैही वसल्लम की खिदमत में हाज़िर हुआ और कहने लगा ऐ मुहम्मद (सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम)! अगर आप बता दें कि मेरी आस्तीन के अंदर क्या है? तो मैं मान लूंगा कि वाकई आप सच्चे नबी हैहुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम ने फरमाया : वाकई ईमान ले आओगे? उसने कहा : हां वाकई ईमान ले आऊंगा। फ़रमाया : तो सुनो, तुम एक जंगल से गुज़र रहे थे। तुमने एक दरख्त देखा जिस पर कबूतर का एक घोंसला था। उस घोंसले में कबूतर के दो बच्चे थे। तुमने इन दोनों बच्चों को पकड़ लिया। बच्चों की मां ने जब देखा तो वह मां अपने बच्चों पर गिरी तो तुमने उसे भी पकड़ लिया। वह दोनों बच्चे और उनकी मां इस वक़्त भी तुम्हारे पास हैं और इस आस्तीन के अंदर हैं। आराबी यह सुनकर हैरान रह गया और झट पुकार उठा -
अशहदु अल-ला इला ह इल्लल्लाह व अशहदु अन न क रसूलुल्लाह

(जामिउल-मुजिज़ात सफा 21)

सबक : हमारे हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम से कोई चीज़ पिनहा न थी। एक आराबी भी इस हक़ीक़त को जानता था कि जो नबी हो वह गैब जान लेता है। फिर जो बराए नाम पढ़ा लिखा होकर हुज़ूर सल्लल्लाहु तआला अलैही वसल्लम के इल्म को तस्लीम न करे वह उज्जड और गंवार से भी ज्यादा उज्जड और गंवार हुआ या नहीं?

(सच्ची हिक़ायत,हिन्दी पेज 39,40)

#सच्ची हिक़ायत
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